संजीव कुमार: वो अभिनेता जिसने किरदारों को ज़िंदगी दी
संजीव कुमार की अनकही कहानी – शोहरत, अकेलापन और अमर किरदार।
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“संजीव कुमार: अभिनय का जादूगर” संजीव कुमार जीवन परिचय : ---हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते है - जो सिर्फ अभिनय नहीं करते, बल्कि हर किरदार को जीते है। संजीव कुमार उन्हीं चुनिंदा अभिनेताओं में से एक थे। पर्दे पर उम्र को कभी बाधा नहीं बनने दिया। 30 की उम्र में बूढ़े का किरदार निभाया और दर्शकों को यकीन दिला दिया कि यही उनकी असली उम्र है।संजीव कुमार का नाम आते ही एक सादगी, एक ठहराव और एक गहरी संवेदना मन में उतर जाती है।शुरूआती जीवन और संघर्ष : एक रंगमंच से निकला सितारा : ---संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। उनका जन्म 9 जुलाई 1938 को सूरत, गुजरात में हुआ। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था और इसी जुनून ने उन्हें मुंबई की ओर खींच लाया।उन्होंने प्रसिद्ध थिएटर आर्टिस्ट इब्राहिम अल्काजी से प्रशिक्षण लिया और इंडियन नेशनल थिएटर से अपने अभिनय करियर की शुरुवात की। थिएटर ने उन्हें अभिनय की गहराई सिखाई, वही गहराई जो बाद में उनके हर किरदार में दिखाई दी।थिएटर से फिल्मों तक का सफर : फिल्मों में कदम और संघर्ष : ---फ़िल्मी दुनिया में कदम रखते ही उन्हें तुरंत पहचान नहीं मिली। 1965 की फिल्म " हम हिन्दुस्तानी " से शुरुआत जरूर हुई, लेकिन असली पहचान आने में वक्त लगा।उन्होंने कई छोटे रोल किये, कई बार नज़र अंदाज भी हुए। लेकिन उन्होंने कभी शॉर्टकट नहीं चुना। उनका मानना था -----" अगर किरदार सच्चा होगा, तो देर से ही सही, पहचान जरूर मिलेगी। "📚 Suggested Reading (Bollymeezon )
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🎬फिल्मों में संघर्ष और पहचान :--- |
1960 के दशक में फिल्मों में एंट्री आसान नहीं थी। छोटे रोल, सीमित स्क्रीन टाइम और पहचान की तलाश, ये सब उन्होंने झेला।
लेकिन 1970 में आई फिल्म “खिलौना” ने उनकी किस्मत बदल दी।एक मानसिक रूप सेअस्थिर व्यक्ति का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे साधारण अभिनेता नहीं हैं।
संजीव कुमार की यादगार फिल्में : जब हर रोल बना मिसाल : ---
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| संजीव कुमार मिसाल बने किरदारों की फिल्मों का पोस्टर |
1970 का दशक संजीव कुमार के करियर का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाय। उन्होंने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
🎬 कोशिश [ 1972 ] : -- एक मूक बधिर व्यक्ति की भूमिका निभाकर उन्होंने अभिनय की परिभाषा ही बदल दी। संवाद के बिना भावनाओं को व्यक्त करना आसान नहीं था, लेकिन संजीव कुमार ने इसे बखूबी निभाया।
🎬 खिलौना [ 1970 ] : -- यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी। मानसिक रूप से अस्थिर युवक का किरदार निभाकर उन्होंने दर्शकों को भावुक कर दिया।
🎬 शोले [1975 ] : -- ठाकुर बलदेव सिंह, बिना हाथों वाला वो किरदार, जिसकी आँखों में बदले की आग थी। यह रोल आज भी भारतीय सिनेमा का आइकोनिक अध्याय माना जाता है।
🎬 आंधी [ 1975 ] : -- सुचित्रा सेन के साथ एक संवेदनशील पति का रोल, राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली यह फिल्म आज भी प्रासंगिक है।
🎬 अंगूर [ 1982 ] : -- कॉमेडी में संजीव कुमार का टाइमिंग कमाल का था। डबल रोल में उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ गंभीर अभिनेता नहीं थे।
अन्य उल्लेखनीय फ़िल्में -----
➕ नया दिन नई रात [1974 ]
➕ पति पत्नी और वो [1978 ]
➕ देवता [ 1978 ]
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| हेमामालिनी, सुचित्रा सेन और मौशमी चटर्जी इनके साथ कभी संजीव कुमार की प्रेम कहानियाँ सुर्ख़ियों में रही। |



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