बॉलीवुड के शीर्ष 10 प्रोडक्शन हाउस
भारतीय फिल्म उद्योग का एक अहम् हिस्सा बॉलीवुड अपने शानदार और विविधतापूर्ण फिल्मों के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि इन फिल्मों के पीछे कौन से प्रोडक्शन हाउस काम करते है ? आईये हम जानेंगे बॉलीवुड के शीर्ष 10 बड़े प्रोडक्शन हाउस के बारे में, जो न केवल फिल्मों का निर्माण करते है, बल्कि हमारी मनोरंजन की दुनिया को भी संवारते है।
1 ] यशराज फिल्म्स
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| यशराज फिल्म्स का लोगो और संस्थापक यश राज चोपड़ा |
हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस में से एक यशराज फिल्म्स है। इसकी स्थापना 1970 में फिल्म उद्योग के अनुभवी निर्देशक और निर्माता यशराज चोपड़ा ने की थी। परन्तु, 2012 से इस प्रोडक्शन हाउस का नेतृत्व उनके बेटे आदित्य चोपड़ा कर रहे है। वैसे यह प्रोडक्शन हाउस मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों का निर्माण और वितरण करता है।
यशराज फिल्म स्टूडियोज : -
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| यशराज फिल्म्स स्टूडियो |
2005 में यशराज चोपड़ा ने मुंबई में 20 एकड़ की भूमि पर यशराज फिल्म्स स्टूडियो की स्थापना की, जिसमे एक 6 मंजिला इमारत भी बनाई है। 2006 में इस स्टूडियो की पहली रोमांटिक थ्रिलर फिल्म " फ़ना " है।
यशराज स्टूडियो की प्रमुख फ़िल्में : -
" कभी कभी " [1976], " काला पत्थर " [1979], " सिलसिला " [1981], " मशाल " [1984], " फासले " [1985], " चाँदनी " [1989], " लम्हे " [1991], " डर " [1993], " दिल तो पागल है " [1997], " कभी अलविदा ना कहना " [2006], " तारे जमीन पर " [2007], " चेन्नई एक्सप्रेस " [2013], " जय हो " [2014] और " पी. के. " [2014] ये टॉप फ़िल्में यशराज फिल्म्स की देन है।
धर्मा प्रोडक्शन्स प्रा. लिमिटेड : -
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| धर्मा प्रोडक्शन्स का लोगो |
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| धर्मा प्रोडक्शन्स के संस्थापक यश जोहर |
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| धर्मा प्रोडक्शन की इमारत |
धर्मा प्रोडक्शन्स प्रा. लिमिटेड की स्थापना विख्यात फिल्म निर्माता यश जोहर ने 1979 में की है। मुंबई में स्थित इस प्रोडक्शन का मुख्य उद्देश्य फिल्म निर्माण और वितरण है। 26 जून 2004 में छाती में संक्रमण के कारण यश जोहर की मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु पश्चात उनके बेटे करण जोहर ने इसकी कमान संभाली है।
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| करण जोहर |
धर्मा प्रोडक्शन की कुछ फ़िल्में : -
" दोस्ताना " [1980], " दुनिया " [1984], " मुक़द्दर का फैसला " [1987], " अग्निपथ " [1990], " गुमराह " [1993], " डुप्लीकेट " [1998], " कुछ कुछ होता है " [1998], " कभी ख़ुशी कभी गम " [2001] और " कल हो ना हो " [2003] इन फिल्मों के आलावा कई अन्य फ़िल्में शामिल है।
रेड चिल्लिस एंटरटेनमेंट : -
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| रेड चिल्लिस एंटरटेनमेंट का लोगो |
रेड चिल्लिस एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2002 में अभिनेता शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान ने की है। रेड चिल्लिस एक भारतीय बहुराष्ट्रीय मनोरंजन समूह कंपनी है। इसकी स्थापना से पूर्व यह ड्रीम्ज अनलिमिटेड नाम से व्यवसाय कर रही थी।
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रेड चिल्लिस न केवल फ़िल्में बनाता है, बल्कि विशेष इफेक्ट्स के लिए जाना जाता है। जैसे फिल्म " चक दे इंडिया " और फिल्म " डॉन "जैसी फिल्मों में यह इफेक्ट्स देखे जा सकते है।
कॉमेडी और एक्शन फिल्मों के निर्माण में साजिद नाडियाडवाला प्रोडक्शन्स का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मुंबई में स्थित नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना साजिद नाडियाडवाला 2005 में की है।
वैसे, नाडियाडवाला परिवार 1955 से फिल्म निर्माण में है। इसी विरासत को जारी रखते हुए साजिद ने इसे एक कंपनी का रूप प्रदान किया है। उनकी इस कंपनी को हिंदी फिल्म उद्योग का एक हिस्सा माना जाता है , जो मोशन पिक्चर, टेलीविज़न और अन्य मनोरंजन के क्षेत्र में कार्यरत है।
नाडियाडवाला परिवार के अब्दुल करीम नाडियाडवाला ने अपनी पहली फिल्म " इंस्पेक्टर " [ 1956 ] में निर्मित की थी। इसके पश्चात उन्होंने फिल्म " ताजमहल " [1963 ] और फिल्म " चित्रलेखा " जैसी क्लासिक फिल्मों का निर्माण किया है।
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| नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड का भवन |
साजिद नाडियाडवाला प्रोडक्शन द्वारा निर्मित कुछ फ़िल्में : -
फ़िल्में " वक़्त हमारा है " [1993], " आंदोलन " [1995], " जीत " [1996], " जुड़वा " [1997], " मुझसे शादी करोगी " [2004], " हाउसफुल -2 " [2012], " हीरोपंती " [ 2014 ], " बागी " [ 2016 ], "हाउसफुल - 4 " [ 2019] और फिल्म " चंदू चैम्पियन " [ 2024 ] शामिल है।
सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, टी-सीरीज़ : -
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| टी - सीरीज का लोगो और संस्थापक गुलशन कुमार |
सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड एक भारतीय संगीत रिकॉर्ड लेबल और फ़िल्म निर्माण कंपनी है, जिस टी-सीरीज़ के नाम से अधिक जाना जाता है। शुरुवाती दौर में इस कंपनी ने अपना व्यवसाय म्यूजिक लेबल से आरम्भ किया था, परन्तु आज एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस बन चूका है।
सुपर कैसेट्स की स्थापना 11 जुलाई 1984 में गुलशन कुमार ने की थी। इस कंपनी को मुख्य रूप से हिन्दी फ़िल्म साउंड ट्रैक और इंडि पॉप संगीत के लिए जाना जाता है।
टी-सीरीज की 1984 में पहली मूल फ़िल्म साउंड ट्रैक रिलीज़ "लल्लू राम" थी, जिसमे संगीतकार रविंद्र जैन ने संगीत दिया था। इस कंपनी को बड़ी सफलता तब मिली जब उसने 1988 में मंसूर खान द्वारा निर्देशित और आमिर खान तथा जूही चावला अभिनीत फ़िल्म "क़यामत से क़यामत तक" के लिए साउंड ट्रैक जारी किया।
टी-सीरीज की प्रमुख फ़िल्मों में :-
फ़िल्में "भूल भुलैया-2" [2022] , "एनिमल" [2023] , "कबीर सींग" [2019] , "तान्हाजी-द-अनसंग वारियर" [2010] , "दृश्यम-2" [2022] , "भारत" [2019] , "साहो" [2019] , "तू झूठी मैं मक्कार" [2023] , "आदिपुरुष" [2023] और "एयरलिफ्ट" [2016] शामिल है।
यूटीवी मोशन पिक्चर्स : ---













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