ये हैं प्रेम चोपड़ा ,प्रेम नाम है इनका... कहानी ज़िंदगी की
प्रेम चोपड़ा की जीवनी ![]() |
| प्रेम चोपड़ा बॉलीवुड विलेन |
हिंदी फिल्मों के इतिहास में खलनायक का किरदार हमेशा से फिल्मों की आत्मा रहा है। नायक की अच्छाई को जितनी चमक मिली है, उतनी ही रोशनी उस बुराई की वजह से पैदा हुई। जिसे स्क्रीन पर निभाया गया। अभिनेता बदलते रहे, कहानियां बदलती रहीं ,लेकिन कुछ चेहरे ऐसे है जिन्होंने खलनायकी को सिर्फ एक किरदार नहीं,बल्कि एक विशेष कला का रूप दिया। इनमे सबसे ऊपर आता है एक नाम -प्रेम चोपड़ा।
उनकी मुस्कराहट में छिपी ख़ामोश धमकी,आँखों में तैरती चालाकी और आवाज़ की धीमी कशिश....... इन सबने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे ' सभ्य ', 'सुसंस्कृत ' परन्तु ' डरावना ' विलेन बनाया।
" प्रेम नाम है मेरा..... प्रेम चोपड़ा !"
यह संवाद सिर्फ एक फिल्म का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में दर्ज एक अमर पहचान बन चूका है।
प्रेम चोपड़ा खलनायक जीवनी : बचपन और प्रारंभिक जीवन ---1967 की फिल्म " उपकार " ने प्रेम चोपड़ा को लगभग रातोंरात पहचान दिलाई। फिल्म में उनका किरदार छोटा था, लेकिन उनकी अदाकारी ने दर्शकों को चौंका दिया -
" मीठी बातों में लिपटी हुई साजिशें। " यह उनकी अगली पहचान बनाने वाली थी।
1970 और 80 के दशक प्रेम चोपड़ा का स्वर्णिम युग माना जाता है। वो कोई चिल्लाने वाला खलनायक नहीं थे। न ही वे अजीब शैली, भारी मेकअप या विचित्र आवाज़ का इस्तेमाल करते थे। उनकी खलनायकी बेहद साधारण पर बेहद खतरनाक थी, एक सामान्य इंसान की तरह दिखते हुए भीतर छुपा दानव।
उनकी खासियतें थी :
- दबे शब्दों में दी गई धमकी।
- धीमी मुस्कान।
- सधा हुआ स्क्रीन - प्रेज़ेन्स।
लड़ाई से पहले, सिर्फ 'नाक पर उंगली फेरते हुए दी गयी चेतावनी।
उनके किरदार ' विलेन ' से ज्यादा ' सुसंस्कृत अपराधी ' लगे - यही उनकी पहचान थी।
प्रेम चोपड़ा के आइकॉनिक संवाद
उनके कई संवाद आज भी भारतीय पॉप - कल्चर का हिस्सा है।
- " प्रेम नाम है मेरा ...... प्रेम चोपड़ा !"
- " बड़ी जालिम दुनिया है, छोटे ! "
- " जिंदगी और मौत उपरवाले के हाथ में है......."
- " इंसान कोशिश कर सकता है। "
इन संवादों की टाइमिंग और भाव–अभिव्यक्ति प्रेम चोपड़ा को एक सिग्नेचर विलन बनाते हैं।
रूपहले पर्दे पर बहुआयामी खलनायक :----
प्रेम चोपड़ा सिर्फ अपराधी या बलात्कारी विलेन नहीं थे- उनकी भूमिकाएँ विविध थीं।
1. भावुक मगर लालची रिश्तेदार
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| "प्रेम चोपड़ा " अभिनीत फिल्मों का पोस्टर |
2. सफेदपोश अपराधी
“बॉबी”, “दाग”, “कला पत्थर” में वे समाज के ऊपरी तबके के लोग थे, जो मुस्कुराते हुए अपराध करते हैं।
3. रोमांटिक विलेन
उनकी इस शैली ने हिंदी फिल्मों में एक नई श्रेणी बनाई—
वो विलेन जो नायिका पर बुरी नज़र रखते हुए भी बातचीत और आचरण में ‘सुसभ्य’ दिखता है।
4. कॉमिक विलन
“शरारत”, “द ग्रेट गैम्बलर” जैसे कुछ फिल्मों में उन्होंने हल्का कॉमेडी टच भी दिया।
राजेश खन्ना और प्रेम चोपड़ा 15 से अधिक फिल्मों में साथ रहे। “दो रास्ते” से लेकर “कटी पतंग” तक दोनों की ऑन-स्क्रीन टकराहट ने दर्शकों को बांधकर रखा। एक तरफ रोमांस का सुपरस्टार, दूसरी तरफ मुस्कुराता हुआ खतरा — स्क्रीन पर ये टकराव हिंदी सिनेमा का क्लासिक हिस्सा है।
धर्मेंद्र, सुनील दत्त और मनोज कुमार के साथ सहयोग -
प्रेम चोपड़ा उन दुर्लभ कलाकारों में रहे जिन्हें सभी टॉप नायकों ने स्वीकार किया। धर्मेंद्र, सुनील दत्त, शशि कपूर, मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन - हर युग के सुपरस्टार के साथ उनका विरोधी पक्ष दर्शकों को पसंद आया। उनके बारे में मशहूर था : -
“हीरो बदलते रहे, पर उनके सामने खलनायक के रूप में प्रेम चोपड़ा हमेशा फिट बैठते रहे।”
व्यक्तिगत जीवन: पर्दे के पीछे एक सज्जन व्यक्ति
स्क्रीन पर जितने क्रूर, मगर निजी जीवन में उतने ही सौम्य, विनम्र और परिवार-प्रिय। उनकी पत्नी उमा चोपड़ा, जो मशहूर अभिनेत्री सरोज खान की बहन हैं, उनके साथ उनका दांपत्य फिल्म इंडस्ट्री में सबसे स्थिर माना जाता है। उनकी तीन बेटियाँ - प्रेणा, राखी और पुनिता – सफल जीवन जी रही हैं। पुनिता की शादी अभिनेता शरमन जोशी से हुई है। प्रेम चोपड़ा अक्सर कहते हैं: -
“लोग मुझे स्क्रीन पर जितना बुरा कहते हैं, असल में मैं उतना ही अच्छा बनना चाहता हूँ।”
पुरस्कार और सन्मान : -
- हालाँकि प्रेम चोपड़ा को कई बार मुख्य पुरस्कारों से वंचित रखा गया, फिर भी उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान मिले:
- फिल्मफेयर अवॉर्ड [ नॉमिनेशन और स्पेशल श्रेणियां ]
- लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड।
- पंजाबी और हिंदी फिल्मों में योगदान के लिए कई सांस्कृतिक सम्मान।
- इंडस्ट्री द्वारा " लिविंग लीजेंड " की उपाधि।
हिंदी फिल्मों में विलेन की परिभाषा बदलने का श्रेय : -
प्रेम चोपड़ा से पहले हिंदी फिल्मों का विलेन दो तरह के होते थे -
- जोर से हँसनेवाला।
- शोर मचने वाला।
लेकिन प्रेम चोपड़ा ने खलनायकी की परिभाषा बदली -
- परिपक्व अभिनय।
- नियंत्रित संवाद।
- रीयलिस्टिक चेहरा।
- चालाकी से भरी मुस्कान।
- ऊँचा उठता हुआ एक भौं।
उनका विलेन " डराता " कम था, " बेचैन " ज्यादा करता था -
दर्शक सोंचते थे -
" कहीं ये इंसान असल जिंदगी में भी ऐसा ही तो नहीं !"
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा : -
आज के विलेन यानी नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, आशुतोष राणा, रॉनित रॉय
इन सभी ने प्रेम चोपड़ा को अपना प्रेरणास्रोत माना है।OTT के दौर में भी प्रेम चोपड़ा का प्रभाव दिखता है। खलनायक को ‘ह्यूमनाइज’ करने का ट्रेंड उन्हीं के कारण लोकप्रिय हुआ।
प्रेम चोपड़ा का प्रभाव और विरासत : -
उनकी पहचान सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक स्कूल की है। वे उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जिनकी वजह से लोगों ने फिल्मों में खलनायक को उतना ही महत्व दिया जितना हीरो को। 50 वर्षों के करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम…हर दशक में सफल उपस्थिति…
और ऐसे संवाद जो समय के साथ और चमकते गए.
यही उनकी विरासत है।
मुस्कुराता खलनायक जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसता है : -
प्रेम चोपड़ा का योगदान उस दौर में है जब हिंदी फिल्मों में हर किरदार को स्पष्ट सीमा में बांटा गया था हीरो बिल्कुल अच्छा और विलेन बिल्कुल बुरा। लेकिन प्रेम चोपड़ा उस सीमा को धुंधला करने वाले पहले कलाकार थे। उन्होंने दिखाया कि खलनायक को भी स्टाइल, शालीनता और प्रभावशाली व्यक्तित्व दिया जा सकता है।
उनकी मुस्कान, संवाद, और स्क्रीन पर उनका धीमा आत्मविश्वास—
आज भी एक ब्रांड है, एक पहचान है, और हिंदी फिल्मों की धरोहर है।
वह खलनायक, जिसे दर्शकों ने जितनी नफ़रत की , उतनी ही मोहब्बत भी दी। उस मुस्कुराते खतरे का नाम — प्रेम चोपड़ा है ।





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