हिंदी सिनेमा में खलनायकों और खलनायिकाओं ने फ़िल्मों को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी अदायगी और तेवर ने दर्शकों के दिलों में रहने वाली 'गब्बर सिंह' और 'मोगैम्बो' जैसी कहानियों को जीवंत किया है। नादिरा, ललिता पवार और बिंदु जैसी खलनायिकाएँ अपने तेवर और अभिनय से फ़िल्मों में अलग-अलग रंग भर देती हैं। इन कलाकारों ने साबित किया है कि एक मज़बूत नकारात्मक किरदार कहानी को रोमांचक बना सकता है।
आइए, हिंदी सिनेमा के ऐसे ही चर्चित और लोकप्रिय खलनायकों के जन्म, निधन और उनकी पहली फिल्मों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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| हीरालाल ठाकुर हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार खलनायक । %20hiralaal%20thakur.jpg) | हीरालाल ठाकुर |
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| | | क्रमांक | अभिनेता / खलनायक | जन्म | निधन | पहली फिल्म |
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| 1] | प्राण | 12 फरवरी 1920 | 12 जुलाई 2013--- | यमला जट (1940, पंजाबी) | | 2] | अजीत | 27 जनवरी 1922---- | 22 अक्टूबर 1998 | शाहजहाँ (1946) | | 3] | के. एन. सिंह | 1 सितंबर 1908----- | 31 जनवरी 2000------ | सुनहरा संसार (1936) | | 4] | जीवन | 24 अक्टूबर 1915----- | 10 जून 1987------ | फैशनेबल इंडिया (1935) | | 5] | अमजद खान | 12 नवंबर 1940----- | 27 जुलाई 1992------ | नाज़नीन (1972) | | 6] | अमरीश पुरी | 22 जून 1932---- | 12 जनवरी 2005---- | रेशमा और शेरा (1971) | | 7] | प्रेम चोपड़ा | 23 सितंबर 1935 | —------------- | चौधरी कर्णैल सिंह (1960, पंजाबी) | | 8] | रंजीत | 12 सितंबर 1946 | —------------ | सावन भादों (1970) | | 9] | गुलशन ग्रोवर | 21 सितंबर 1955 | —------------ | हम पांच (1980) | | 10] | शक्ति कपूर | 3 सितंबर 1952 | —---------------- | खेल खिलाड़ी का (1977) | | 11] | डैनी डेन्जोंगपा | 25 फरवरी 1948 | —---------------- | जरूरत (1972) | | 12] | अमरीश पुरी | 22 जून 1932---- | 12 जनवरी 2005----- | रेशमा और शेरा (1971) | | 13] | कादर खान | 22 अक्टूबर 1937 | 31 दिसंबर 2018 | दाग (1973) | | 14] | मदन पुरी | 30 सितंबर 1915 | 13 जनवरी 1985 | अहिंसा (1947) | | 15] | मैक मोहन | 24 अप्रैल 1938 | 10 मई 2010 | हकीकत (1964) |
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| हिंदी सिनेमा में खलनायकों ने फिल्मों को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राण की डरावनी अदायगी, अमजद खान का 'गब्बर सिंह' और अमरीश पुरी का 'मोगैम्बो' आज भी दर्शकों के दिलों में सजीव हैं। इन कलाकारों ने अपने अभिनय से साबित किया है कि एक मजबूत खलनायक किसी भी फिल्म की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हिंदी सिनेमा की खलनायिकायें : -----
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| | क्रमांक | अभिनेत्री / खलनायिका | जन्म | निधन | पहली फिल्म |
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| 1 | नादिरा | 5 दिसंबर 1932 | 9 फरवरी 2006 | आन (1952) | | 2 | ललिता पवार | 18 अप्रैल 1916 | 24 फरवरी 1998 | आर्य महिला (1928, मूक फिल्म) | | 3 | हेलेन | 21 नवंबर 1938 | — | हावड़ा ब्रिज (1958) | | 4 | बिंदु | 17 अप्रैल 1941 | — | अनपढ़ (1962) | | 5 | अरुणा ईरानी | 18 अगस्त 1946 | — | गंगा जमुना (1961) | | 6 | शशिकला | 4 अगस्त 1932 | 4 अप्रैल 2021 | ज़ीनत (1945) | | 7 | नाज़िमा | 26 जुलाई 1948 | 9 अप्रैल 1997 | आरज़ू (1965) | | 8 | कंचन | 16 अगस्त 1952 | — | फरेब (1968) | | 9 | रंजिता | 22 सितंबर 1956 | — | लैला मजनू (1976) | | 10 | अंजना मुमताज़ | 4 जनवरी 1941 | — | गहरा दाग (1963) | | 11 | कल्पना अय्यर | 17 अप्रैल 1955 | — | मंज़िल मंज़िल (1984) | | 12 | मंजू सिंह | 1941 | 2022 | साथी (1968) | | 13 | रोहिणी हट्टंगड़ी | 11 अप्रैल 1955 | — | अरविंद देसाई की अजीब दास्तान (1978) | | 14 | किरण खेर | 14 जून 1952 | — | आसरा प्यार दा (1983, पंजाबी) | | 15 | सुषमा सेठ | 20 जून 1936 | — | जुनून (1978) |
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| हिंदी सिनेमा की खलनायिकाओं की खासियत यह रही है कि उन्होंने अपनी
अद्वितीय अदाओं के साथ, तेज बोलचाल और प्रभावशाली पर्सनैलिटी के साथ
फ़िल्मों में अलग मायने रखा। नादिरा और ललिता पवार जैसी कलाकारियों ने कठोर
सास, चालाक महिला और नकारात्मक चरित्रों को इतनी जीवंतता से निभाया कि वे
दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गई। वहीं हेलेन और बिंदु ने ग्लैमर
और नकारात्मक भूमिकाओं का एक नया आयाम स्थापित किया जिसने हिन्दी फ़िल्मों
को नया जीवन दिया। |
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