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भारतीय अभिनेता मदन पुरी- जीवन परिचय

 मदन पुरी का जीवन परिचय

                                 

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 खलनायकी का बादशाह मदन पुरी

           

                 हिंदी सिनेमा में जब भी खलनायकों की चर्चा होती है, कुछ नाम अपने आप ज़हन में चमक उठते हैं। उन दुर्लभ नामों में से एक है - मदन पुरी। अपनी घूरती नज़र, रेशमी आवाज़, सधे हुए हाव-भाव और अभिनय के ठोस अंदाज़ के चलते वे दशकों तक बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा विलेन बने रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर खूँखार दिखने वाले मदन पुरी असल ज़िंदगी में बेहद शांत, संवेदनशील और बेहद अनुशासित इंसान थे? यही विरोधाभास उन्हें एक अनोखा और अविस्मरणीय अभिनेता बनाता है।

मदन पुरी का जीवन परिचय : अभिनय की ओर बढ़ते कदम : -

                  मदन पुरी का जन्म 30 सितंबर 1915 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका परिवार शिक्षित और साहित्यिक रुचि वाला था। उनके छोटे भाई अमरीश पुरी और चमन पुरी भी आगे चलकर उत्कृष्ट अभिनेता बने। बचपन से ही मदन में अभिनय की खूबियाँ दिखाई देने लगी थीं—स्कूल के नाटकों में संवाद बोलने का उनका अंदाज़ सभी का ध्यान खींच लेता था।

                                 

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज खलनायक भाई। 

               लाहौर में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय सरकारी नौकरी की, लेकिन मन तो अभिनय में ही रमता था। फिल्मों का आकर्षण उन्हें बंबई (अब मुंबई) खींच लाया—जहाँ संघर्ष तो था, पर प्रतिभा उससे कहीं अधिक।                                           

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मदन पूरी की प्रथम फिल्म " आप की सेवा में " [1947 ]

मदन पुरी का फिल्मी करियर : सफर की शुरुआत : - 

               मदन पुरी ने 1940 के दशक में फिल्मों में प्रवेश किया। शुरू-शुरू में उन्हें छोटे-मोटे रोल मिले, पर वे जो भी करते थे, उसमें एक खास धार नजर आती थी। उनकी पहली पहचान 1946 की फिल्म “आपकी सेवा में” से बनी, लेकिन असली लोकप्रियता 1950 के दशक से शुरू हुई जब उन्होंने खलनायकी को एक नया चेहरा दिया।     

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मदन पूरी नेगेटिव रोल्स : ---

               1950 से 1970s तक मदन पूरी ने विलेन की परिभाषा बदल दी। उनसे पहले भी विलेन थे, पर मदन पूरी ने खलनायकी में एक सलीका, एक स्टाइल, एक विशिष्टता ला दी। वे केवल गुस्सैल खलनायक नहीं थे --- 

  •                '  कभी स्मगलर,
  •                '  कभी धूर्त कारोबारी, 
  •                '  तो कभी चतुर पुलिस अधिकारी।

                हर किरदार को वे इतनी बारीकी से निभाते थे कि दर्शक उन्हें पसंद  भी करते थे और नफरत भी।  

                 उनकी आँखों का तेज, मुस्कान की चालाकी और संवाद अदायगी इतनी प्रभावी थी की कई बार हीरो से अधिक चर्चा उनके ही किरदार की होती थी। 

मदन पूरी की फ़िल्में  : ---                                         

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मदन पूरी की कुछ यादगार फिल्मों के पोस्टर 


              मदन पूरी के फिल्मों की लम्बी फेहरिस्त है, करीब 50 सालों के करियर में उन्होंने 300 से अधिक फ़िल्में की और लगभग हर फिल्म में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। उनकी कुछ यादगार फिल्मों की फेहरिस्त में शामिल है -----   

  " देवर [ 1966 ]", " गुमनाम [1965 ]", " हमराज [ 1967 ]", " आँखें [1968 ]", " बीस साल बाद [ 1962 ]", " उपकार [1967 ]", " रोटी कपडा और मकान [ 1947 ]" और " धुंद [1973 ]" शामिल है। 

             मदन पूरी की खासियत यह थी कि वे कभी खुद को किरदार से ऊपर नहीं रखते थे।  वे स्क्रिप्ट देखकर ये सोंचते थे कि " ये भूमिका कहानी में कहाँ खड़ी है ? " और जब वक़्त आता, वह भूमिका कहानी का सबसे मजबूत स्तंभ बन जाती। 

मदन पूरी अननोन फैट्स : ---  

             पर्दे के पीछे के मदन पूरी की असल जिंदगी, उनके ऑन - स्क्रीन इमेज से बिलकुल उलट थी --- 

  •       वे परिवार से बेहद जुड़े हुए व्यक्ति थे। 
  •       पढ़ने - लिखने और शांत वातावरण में समय बिताना पसंद करते थे। 
  •       शराब और तमाम बुरी आदतों से दूर रहते थे। 
  •       अनुशासन और समय की पाबंदी उनके लिए सर्वप्रथम थी। 

             फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार अक्सर कहते थे कि " मदन पूरी जैसा प्रोफेशनल" कलाकार शायद ही मिलेगा, क्योंकि वे समय पर सेट पर पहुंचते, काम पूरा करते और जल्दी घर लौट जाते। 

 अमरीश पूरी के करियर में अहम् योगदान  : ----   

              बॉलीवुड क्लासिक विलेन्स के अमरीश पूरी के करियर में  मदन पूरी का अहम् योगदान रहा है। कम ही लोग जानते है कि मदन पूरी ने अपने छोटे भाई ' अमरीश पूरी ' को इंडस्ट्री में जमने में काफी मदद की है।             

           अमरीश पूरी संघर्ष के दिनों में कई बार निराश हुए, लेकिन मदन हमेशा उनका हौसला बढ़ाते थे।  उन्होंने भाई की आवाज, व्यक्तित्व और अभिनय क्षमता पहचानी और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। 

               इस तरह हिंदी सिनेमा के दो दिग्गज खलनायक एक ही घर से निकले। 

पुरस्कार और सम्मान  : ----  

               हालांकि, मदन पूरी को बड़े अवार्ड्स की तलाश कभी नहीं रही, पर उन्हें - ' फिल्म जगत में अभिनय की ' निरंतरता, ' प्रोफेशनलिजम्म और नकारात्मक भूमिकाओं में गहराई लाने के लिए व्यापक सराहना मिली। 

               कई फिल्म फैन क्लब्स और इंडस्ट्री के दिग्गजों ने उन्हें " एवरग्रीन विलेन " कहा।  

मदन पूरी का जीवन परिचय : अंतिम दिनों की झलक : ---- 

               1980 का दशक आते - आते मदन पूरी की उम्र काफी बढ़ चुकी थी, लेकिन उनकी ऊर्जा फिल्मों में बरकरार थी। वे लगातार काम करते रहे, क्योंकि अभिनय उनका जूनून था। 

               13 जनवरी 1985 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। दुःख की बात यह है कि निधन के बाद भी उनकी कई फ़िल्में रिलीज़ होती रही, ये उनकी लोकप्रियता और काम के प्रति समर्पण का सबूत है। 

हिंदी सिनेमा में मदन पूरी का योगदान : --- 

                मदन पूरी केवल खलनायक नहीं थे, वे एक " किरदार कलाकार " थे। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि " नेगेटिव रोल " भी उतना ही शक्तिशाली होता है, जितना हीरो का रोल।

               बॉलीवुड विलेन इतिहास  में मदन पूरी की 5 बड़ी देने ---

         1]   खलनायकी में शालीनता और सटीकता जोड़ना। 

         2]    विभिन्न प्रकार के नेगेटिव किरदारों का निर्माण। 

         3]    युवा कलाकारों को प्रेरित करना। 

         4]    अपनी आवाज़ और स्टाइल से नए एक्टिंग स्टैंडर्ड सेट करना। 

         5]    लम्बा, निरंतर और मजबूत फ़िल्मी सफर। 

               आज भी कई विलेन अभिनेता मदन पूरी को अपना गुरु और प्रेरणा स्त्रोत मानते है। 

                मदन पूरी का नाम केवल विलेन के रूप में नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे बहुमुखी और दीर्घकालिक कलाकारों में शामिल होता है। उन्होंने दर्शकों को डराया भी, आकर्षित भी किया और कभी कभी भावुक भी कर दिया।  उनका अभिनय, उनकी नजर, उनकी मुस्कान सब आज भी फिल्मों में जिन्दा है। 

 

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