आशा पारेख की वह अनसुनी कहानी, जिसने उनकी ज़िंदगी बदल दी!

 

  Asha Parekh Biography in Hindi

स्वर्णिम दौर का हिस्सा रही आशा पारेख तब और अब 
 

              आशा पारेख हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का एक अहम हिस्सा हैं। 1960 और 1970 के दशक में उनकी मासूम मुस्कान, शानदार अभिनय और बेहतरीन नृत्य ने करोड़ों दर्शकों का दिल जीता। क्या आप जानते हैं कि जिस अभिनेत्री ने बाद में सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया, उसे करियर की शुरुआत में ही यह कहकर ठुकरा दिया गया था कि वह कभी हीरोइन नहीं बन सकती?

                  यही वह अनसुनी कहानी है जिसने न केवल आशा पारेख की जिंदगी बदल दी, बल्कि यह साबित कर दिया कि असफलता अक्सर सफलता की पहली सीढ़ी होती है। 

 आशाजी का बचपन से ही कला के प्रति लगाव : ---   

                                     
बचपन की आशा पारेख 

                   2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में जन्मी अभिनेत्री आशा पारेख बचपन से ही बेहद प्रतिभाशाली थी। उनकी माँ सुधा पारेख चाहती थी कि बेटी कला के क्षेत्र में आगे बढ़ें। उन्होंने इसीलिए बहुत छोटी आयु से ही आशा को शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दिलाई थी। 

                   अभिनेत्री ! आशा पारेख ने कथक सहित कई नृत्य शैलियों का प्रशिक्षण लिया है। उनके मंचीय कार्यक्रमों को देखकर दर्शक उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करते नहीं थकते थे। यहीं नृत्य आगे चलकर उनके फ़िल्मी सफर का आधार बना। 

बाल कलाकार के रूप में पहला कदम : -----   

                   नृत्य कार्यक्रमों  के दौरान आशा पारेख की प्रतिभा पर फिल्म निर्माताओं की भी नज़र पड़ी। उन्हें बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। हालांकि, आशाजी की भूमिका छोटी थी, परन्तु कैमेरे के सामने उनका आत्मविश्वास साफ़ दिखाई देता था। 

                   धीरे - धीरे उनके मन में एक सपना जन्म लेने लगा - एक दिन हिंदी फिल्मों की मुख्य नायिका बनने का। 

वह दिन जिसने सब कुछ बदल दिया : ------ 

                                       
युवा आशा पारेख 

                     किशोरावस्था में पहुँचने के बाद आशा पारेख ने कई फिल्मों के लिए स्क्रीन टेस्ट दिए। उसी दौरान उन्हें एक बड़ी फिल्म के लिए ऑडिशन देना पड़ा। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि यह फिल्म उनके करियर की दिशा बदल देगी। लेकिन उनकी उम्मीद का परिणाम बिलकुल विपरीत आया। 

                     निर्माताओं ने उन्हें यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उनमे हीरोइन बननेवाली बात नहीं है। उनका चेहरा उस समय की पारम्परिक नायिकाओं जैसा नहीं माना गया। यह सुनना किसी भी युवा कलाकार के लिए बहुत बड़ा झटका था। 

                    कल्पना कीजिये, यदि उस समय आशा पारेख ने हार मान ली होती, तो हो सकता है भारतीय सिनेमा को उसकी सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक कभी नहीं मिलती। 

किस्मत ने लिया अप्रत्याशित मोड़ : ----  

                                       
प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन और उनकी फिल्म का पोस्टर 
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                     कुछ समय बाद प्रसिद्ध निर्माता - निर्देशक नासिर हुसैन एक नई फिल्म के लिए किसी नई अभिनेत्री की तलाश कर रहे थे। उन्होंने आशा पारेख को देखा और उनमे वह आत्मविश्वास, मासूमियत और स्क्रीन प्रेसेंस महसूस की जिसकी उन्हें तलाश थी। उन्होंने आशा पारेख को अपनी फिल्म " दिल देके देखो " में मुख्य अभिनेत्री का अवसर प्रदान किया। 
                                       
युवा अभिनेता शम्मी कपूर और युवा अभिनेत्री आशा पारेख 
                
                   फिल्म " दिल देके देखो " [ 1959 ] में उनके साथ थे युवा अभिनेता शम्मी कपूर रिलीज़ के पश्चात यह फिल्म जबरदस्त सुपरहिट साबित हुई। रातोंरात आशा पारेख पूरे देश की नई स्टार बन गयी थी। 
             यह वह मोड़ था जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदला दी। 
 
सफलता  का सुनहरा दौर : ----          

                    फिल्म " दिल देके देखो " की सफलता के बाद आशा पारेख के पास फिल्मों की लाइन लग गई। उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ----

1 ] " जब प्यार किसी से होता है " 2 ] " फिर वही दिल लाया हूँ " 3 ] " तीसरी मंजिल " 4]  " लव इन शिमला " 5 ]  " दो बदन" 6] " कारवाँ " 7 ] " कटी पतंग " और 8] " मेरा गांव मेरा देश " शामिल है। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया है। 

निर्माता नासिर हुसैन की पसंदीदा अभिनेत्री : -----  

                      आशा पारेख और नासिर हुसैन की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे सफल जोड़ियों में गिनी जाती है। उन्होंने उनकी कई फिल्मों में काम किया और लगभग उनकी हर फिल्म ने बॉक्सऑफिस पर सफलता हासिल की।  दर्शकों को उनकी चुलबुल अदाएँ, स्वाभाविक अभिनय और शानदार नृत्य बेहद पसंद आया। 

शम्मी कपूर के साथ जादुई जोड़ी : ------  

                     यदि आशा पारेख की सबसे लोकप्रिय ऑन - स्क्रीन जोड़ियों की बात की जाए तो शम्मी कपूर का नाम सबसे पहले आता है। दोनों की ऊर्जा, रोमांस और संगीत से भरपूर फ़िल्में आज भी दर्शकों की पसंद बनी हुई है। कई फिल्म समीक्षक मानते है कि शम्मी कपूर की जोशीली शैली और आशा पारेख की सहज मुस्कान ने उस दौर के रोमांटिक सिनेमा को एक नई पहचान दी है।  

अभिनय के साथ नृत्य में भी महारत : ----

                      आशा पारेख केवल अभिनेत्री ही नहीं थी, बल्कि बेहतरीन नृत्यांगना भी थी। उनके गीतों में भाव - भंगिमाय, लय और अभिव्यक्ति इतनी स्वाभाविक होती थी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। 

                      आज भी उनके गीत " आजा आजा मै हूँ प्यार तेरा ", " ओ मेरे सोना रे " और कई अन्य गीत उनके शानदार प्रदर्शन के कारण याद किए जाते है। 

निजी जीवन का एक अलग फैसला : -----

                       फ़िल्मी करियर के दौरान आशा पारेख का नाम कई लोगों के साथ जोड़ा गया, लेकिन उन्होंने विवाह नहीं किया। उन्होंने अपने कई साक्षात्कारों में कहा है कि जीवन में हर व्यक्ति का अपना रास्ता होता है और उन्होंने अपने करियर तथा अपने परिवार को प्रार्थमिकता दी। 

                      आशा पारेख का यह निर्णय उस दौर में काफी चर्चा का विषय बना, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी गरिमा और आत्मसम्मान बनाए रखा। 

कैमरे के पीछे भी निभाई बड़ी भूमिका : ------

                         सिर्फ अभिनय तक ही सिमित न रहकर आशा पारेख ने आगे चलकर टेलीविजन निर्माण और सामाजिक कार्यों में भी योगदान दिया है। 

                          उन्होंने फिल्म उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए और नई पीढ़ी के कलाकारों का मार्गदर्शन भी किया। उनकी सादगी और अनुशासन की आज भी मिसाल दी जाती है। 

                     लोकप्रिय अभिनेत्री आशा पारेख की कहानी हमें एक महत्वपूर्ण सीख देती है --- यदि किसी एक व्यक्ति ने आपकी क्षमता पर विश्वास नहीं किया, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप योग्य नहीं है। 

                     एक समय उन्हें यह कहकर ठुकरा दिया गया था कि वे हीरोइन नहीं बन सकती। लेकिन कुछ ही वर्षों बाद वही अभिनेत्री हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और सबसे अधिक पारिश्रमिक पानेवाली अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगी। 

                    उनकी यह फ़िल्मी यात्रा बताती है कि प्रतिभा, मेहनत और धैर्य मिल जाय तो किस्मत भी अपना रास्ता बदल देती है।  

आशा पारेख को मिले प्रमुख पुरस्कार और सम्मान : ----- 

                    करीब छह दशकों तक भारतीय सिनेमा में अपने अमूल्य योगदान के लिए आशा पारेख को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उनके प्रमुख पुरस्कारों में -----

1] ' पद्मश्री ' [1992] 

                          भारत सरकार द्वारा वर्ष 1992 में कला और भारतीय सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ' पद्मश्री ' से सम्मानित किया गया। यह देश का चौथा सर्वाच्च नागरिक सम्मान है।     

2]  फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार (1971)

                        फिल्म " कटी पतंग " (1970) में अपने संवेदनशील और प्रभावशाली अभिनय के लिए आशा पारेख को 1971 का ' फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार' मिला। यह उनके करियर का सबसे चर्चित अभिनय पुरस्कार माना जाता है। 

3]  फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2002)

                     हिंदी सिनेमा में चार दशकों से अधिक समय तक दिए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में 2002 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।

4] दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2022)

                 भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से वर्ष 2022 में आशा पारेख को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में उनके आजीवन योगदान के लिए प्रदान किया गया।

5] अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी (IIFA) लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान

                भारतीय सिनेमा में उनके दीर्घकालीन योगदान को देखते हुए उन्हें आईफा (IIFA) लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान भी प्रदान किया गया। 

6] स्क्रीन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

                लोकप्रिय फिल्म पुरस्कार समारोह स्क्रीन अवॉर्ड्स ने भी उन्हें उनके उत्कृष्ट फिल्मी सफर के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से सम्मानित किया।

7] जी सिने अवॉर्ड्स – लाइफटाइम अचीवमेंट

                  ज़ी सिने अवॉर्ड्स ने भी हिंदी सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया।

8] महाराष्ट्र सरकार एवं विभिन्न फिल्म संस्थाओं द्वारा सम्मान

                  आशा पारेख को समय-समय पर महाराष्ट्र सरकार, विभिन्न फिल्म समारोहों, सांस्कृतिक संस्थाओं और फिल्म संगठनों द्वारा भी विशेष सम्मान एवं लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किए गए।

सम्मान से बढ़कर उनकी विरासत : - 

                  आशा पारेख के लिए पुरस्कार केवल ट्रॉफियाँ नहीं रहे, बल्कि उनके अनुशासन, मेहनत और अभिनय प्रतिभा की पहचान बने। उन्होंने लगभग 80 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया और 1960–70 के दशक की सबसे सफल अभिनेत्रियों में अपना नाम दर्ज कराया। आज भी उनका नाम भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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